जब भी क्रोध आए, सबसे पहला नियम है—। ठाकुर जी महाराज कहते हैं कि क्रोध की अवस्था में शब्द जहर के समान होते हैं। यदि उस समय आप कुछ बोलेंगे, तो वह केवल रिश्तों को तोड़ेगा। 10 मिनट का मौन आपके मस्तिष्क को शांत करने के लिए पर्याप्त है। 2. 'हरि नाम' का आश्रय
4. लंबी सांसें लें (Deep Breathing) (How to Calm the Anger of Mind) हमारा
मन के क्रोध को कैसे शांत करें? (How to Calm the Anger of Mind) दया की जाती है।
हमारा मन वैसा ही बनता है जैसा हम सुनते और देखते हैं। प्रतिदिन ठाकुर जी महाराज जैसे संतों का सुनने से बुद्धि में विवेक जाग्रत होता है। विवेक हमें यह सोचने की शक्ति देता है कि "क्या यह बात गुस्सा करने के लायक है?" निष्कर्ष जब भी क्रोध आए
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक, दोनों दृष्टियों से गहरी सांसें मन को शांत करती हैं। क्रोध के समय शरीर में ऊर्जा का स्तर अनियंत्रित हो जाता है। धीरे-धीरे लंबी सांस लेने से 'प्राण शक्ति' संतुलित होती है और मन स्थिर होने लगता है। 5. सत्संग और विचार
क्रोध को दबाना नहीं, बल्कि उसे से बदलना जरूरी है। जब हृदय में भक्ति और प्रेम का वास होता है, तो क्रोध के लिए कोई स्थान नहीं बचता। याद रखिए, शांत मन ही ईश्वर का असली मंदिर है। राधे-राधे!
क्रोध का मुख्य कारण यह है कि हम चाहते हैं कि दुनिया हमारे हिसाब से चले। ठाकुर जी समझाते हैं कि सामने वाले को उसकी गलतियों के साथ स्वीकार करना ही 'क्षमा' है। यह याद रखें कि जो व्यक्ति गुस्सा कर रहा है, वह मानसिक रूप से बीमार है। रोगी पर गुस्सा नहीं, दया की जाती है।